हौसले की सुबह।
हौसला रख, ये अँधेरा भी गुजर जाएगा,
तेरा हर ज़ख्म ही इक दिन तो भर जाएगा।
रात कितनी भी हो गहरी, नहीं रहती सदा,
सुबह का नूर भी हर हाल उतर जाएगा।
दर्द को थाम के मत बैठ यूँ हार मान,
चल पड़ेगा तो ही रास्ता निखर जाएगा।
साँस चलती है तो उम्मीद भी बाकी है अभी,
ये बदन फिर से नई ताक़त से भर जाएगा।
आँधियों से जो लड़ा है वही जीता है सदा,
तू अगर डट के खड़ा हो तो संवर जाएगा।
मुस्कुरा दे ज़रा, हालात बदलते हैं यहाँ,
तेरा ये वक्त भी इक दिन तो गुजर जाएगा।
नाम अपना न गिरा, हिम्मत बनाए रख तू,
देखना, फिर से तू पहले सा उभर जाएगा।
- प्रसंग
प्रणयराज रणवीर