कुछ क्षण पहले सभा में खड़ी वो
अपने सतीत्व की परीक्षा दे रही थी।
राम के भरे दरबार में जानकी
अपनी पवित्रता का प्रमाण दे रही थी।
वाल्मीकि संग लव कुश,
सिया के साथ थे।
पर नगर के वासियों के हृदय,
अभी भी विषाक्त थे।
जब दे दे सफाई जानकी हर गई,
तो भू देवी उनके प्रमाण बन आ गई थी।
साबित कर अपना चरित्र पवित्र,
जानकी अब जा रही थी।
कुछ क्षण पहले सभा में खड़ी वो
अपने सतीत्व की परीक्षा दे रही थी।
प्रमाण देख नगर के वासी हाथ जोड़ विनती करने लगे
राम भी अपनी सिया को रोकने भागन लगे।
पर नियति से हारी सिया
अपना जीवन त्याग चुकी थी।
जब तक राम पहुंचें उन तक,
वो सिया तो यह धरा छोड़ कर जा चुकी थी.........
- vrinda