" तू पढ़ ले नमाज़ हर वक़्त, ऐ आशिक-ए-ख़ुदा,
मैं एक मन्नत के धागे से उसे तुझसे छीन लूंगा। "
" तू चाहे हर दरगाह पर चादर चढ़ा ले, ऐ मुसाफ़िर,
मैं एक दीये की ज्योत से उसे किस्मत से भी छीन लूंगा। "
" तू रख ले रोज़ा हर दिन, ऐ परहेज़गार,
मैं मंदिरो में सिर झुका कर उसे हासिल कर लूंगा। "
" तू तस्बीह के हर दाने पर दुआएँ करता रह, ऐ मोहसिन,
मैं उसी ख़ुदा के सामने उससे निकाह पढ़ लूंगा।"