देखा उसे जब पहली बार, गुस्से का पारा चढ़ा हुआ था,
चेहरे पर सख्ती ऐसी थी, जैसे हर लम्हा अड़ा हुआ था।
आंखों में उसकी अजीब सी, एक चुभन सी झलक रही थी,
पर जाने क्यों उस चुभन में भी, एक कहानी छुप रही थी।
भौंहें तनी, लब खामोश थे, पर दिल कुछ कह जाता था,
उसका हर एक अंदाज़ मुझे, अपनी ओर खींच जाता था।
ना हंसी, ना कोई बात, बस खामोशी का साया था,
फिर भी उस अनजाने चेहरे में, कुछ अपना सा पाया था।
शायद वो गुस्सा झूठा था, या दिल कहीं टूटा होगा,
उसकी उस खामोशी के पीछे, कोई दर्द जरूर छुपा होगा।
अजीब सा रिश्ता बन गया, पहली ही उस मुलाकात में,
गुस्से वाला वो चेहरा बस, बस गया मेरी हर बात में।
कभी सोचा ना था ऐसा भी, कोई दिल को भा जाएगा,
गुस्से में भी कोई इतना, खास नजर आ जाएगा।
आज भी याद है वो पल, जब पहली बार देखा था,
उसके गुस्से में ही मैंने, अपना सुकून लिखा था। ✨