गुल्लक
"वाह मम्मी ! इतनी बड़ी गुल्लक लेकिन इस गुल्लक को भरने में तो सालों लग जाएंगे!"
राहुल गुल्लक की जांच पड़ताल करते हुए बोला।
" तू फिजूलखर्ची कम करेगा तो देखना तेरी गुल्लक का पेट 1 साल में ही भर जाएगा।" मां हंसते हुए बोली।
"वैसे मम्मी बचपन में आपकी गुल्लक भरने में कितना समय लगता था।" शरारत से मुस्कुराते हुए उसने पूछा।
" मेरी गुल्लक भरने में तो सालों लग जाते थे बेटा!!"
"यानी आप फिजूलखर्ची करती थी।"
" फिजूलखर्ची तो तब करती, जब खर्च करने को कुछ होता। तेरे नानाजी बीमारी के कारण जल्दी चल बसे। उनके बाद तेरी नानी ने किस तरह हम चारों बहन भाइयों को पाला बता नहीं सकती।
हां तेरी नानी ने हमारी जिंदगी की गुल्लक को शिक्षा से भरा और आज उसी की बदौलत हम सब अपने पैरों पर खड़े हैं। बस बेटा, तुम भी यह समझ लो कि अगर तुमने अपनी जिंदगी रूपी गुल्लक को शिक्षा रूपी धन से भर लिया तो बाकी गुल्लकें अपने आप भर जाएंगी । चाहे धन की हो या रिश्तेदारों की।"
अपनी मां की कही यह गहरी बात राहुल को कुछ-कुछ समझ आ गई थी इसलिए उसने मुस्कुराते हुए सहमति में
सिर हिला दिया।
सरोज प्रजापति ✍️
स्वरचित मौलिक
- Saroj Prajapati