तेरे ताल से मेरा ताल मिले ये ज़रूरी नहीं है,
तेरे आगे मेरी नज़र झुक जाए ये संभव नहीं है।
हम अपने ही उसूलों पे जीना जानते हैं,
हर मोड़ पे तेरे क़दमों की ज़रूरत नहीं है।
तेरी हर बात को सच मान लूँ, ये भी क्या कम है?
मगर मेरे हर ख़्वाब में तेरी ही तस्वीर नहीं है।
ख़ामोशी मेरी कमज़ोरी समझ लेना भूल है,
हर चुप्पी के पीछे हार की दास्तान नहीं है।
मैं तन्हा सही, मगर मुकम्मल हूँ अपने आप में,
किसी सहारे की अब मुझको दरकार नहीं है।
तेरे साथ चलूँ तो शर्तों में चलूँ, ये मंज़ूर नहीं,
मोहब्बत अगर क़ैद बने तो वो इश्क़ नहीं है।