वो जो है मेरी परछाई ,
उसे भी दिलाना याद कहना ओ भाई।
वैसे तो जीत कर ही मैं वापस लौटूंगा,
और अगर न आया तो तिरंगे में लेटूंगा।
सदा मां बाबा का ख्याल तू रखेगा ,
पढ़ाई में भी अव्वल सदा यूं आएगा ।
वो बोले मुझको आप ये न बोलो ना।
अकेले छोड़ कर हमको न चले जाना।
उसकी बातों ने उसके खतों ने
और पूछा है बचपन की यादों ने
की घर कब आओगे कि घर कब आओगे।
लिखो कब आओगे कि तुम बिन यादें अधूरी अधूरी है।
पूछा है बाबा ने कि घर कब आएगा,
तेरे आने से आंगन खिल जाएगा।
लिखते है बापू बेटे को कौन-सी मिठाई भेजूं मैं?
करी है सगाई भाई की फोटो भी भेजी है ।
अगली बार जब आए तो लंबी छुट्टी पर आना ।
अब चिट्ठियों में न होगा बतियाना ।
कांपती अंगुलियों ने, तरसती आंखों ने
कड़कती आवाज ने और पूछा है बाबा की लाठी ने।
कि घर कब आओगे कि घर कब आओगे।
लिखो कब आओगे कि तुम बिन बातें सूनी-सूनी है।
सृष्टि तिवाड़ी 'शान‘