की ऊस मंजिलको मेने इत्नी पास से देखाता की उस्से मिलनेकिभी मुजमे हिंमत नाही ती
बस चंद कदम का हमार फासला था पर फिरभी तुम दूर जाती दीख रही थी
कर नहीं सकता ऊस पलको मे बाय अब इन किस्सोमे
बात ही कुछ ऐसी ती की जो समजा ना सका मे अपनी ही जिन्दगीको खुदकेही किस्सोमे
- Kartik Kule