Marathi Quote in Poem by Subhash Mandale

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तुझ्याशिवाय....


जीवन तुला काय कळाले,
कठीण प्रसंगी सगळे पळाले.
सगळे मनासारखे घडले पाहिजे,
असे कुठे असते का?

               मखमली जीवनात सुख-दुःखाचा,
पाठशिवणीचा खेळ चालनारच.
दुःखाचा डोंगर सरत नाही,
              म्हणून कोणी मरतं का?

आपण मेलं की काही नाही उरत,
थोड्या दिवस उरतात त्या फक्त आठवणी
तुझ्यासोबत खूप शिव्या दिल्या सरणाला,
आता मात्र कवटाळून बसावसं वाटतंय मरणाला.

               तु माझ्यासाठी रोज नटत होतीस,
प्रसन्न जीवन जगण्यासाठी रोज भेटत होतीस.
माझं गुलाबी मन उन्हाने होरपळून निघतंय,
              तुझ्या आठवणीत माझं मन रोज मरतंय.

उजेड संपला, अंधार दाटला,
सारा मायेचा पाझर आटला.
काय करु? कुणाला सांगू?,
माझं हृदय लागलंय फाटू. 

तू मला सोडलं असतं, वाईट वाटलं नसतं,

वाईट वाटतंय, जीवन जगणं सोडलंस.
तू गेलीस,पण मी नाही जाणार,कारण
देवाला,तू जाण्याचा जाब कोण विचारणार.........

(आपल्या आयुष्यातून माणूस निघून गेला,की मग त्याच्या विषयीचं सगळं निट लिहून काढलं की त्याच्या जाण्याचा खरा अर्थ आपल्याला समजतो)

                                     _"दि सुभाष"

Marathi Poem by Subhash Mandale : 111294216
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गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर
गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर

सुबह की पहली किरण जैसे ही खेतों पर पड़ती, पूरा गांव सुनहरी रोशनी से जगमगा उठता। पक्षियों की मधुर चहचहाहट, मंदिर की घंटियों की आवाज़ और ठंडी हवा मन को एक अलग ही शांति देती थी।

शहर में रहने वाली अनन्या कई साल बाद अपने दादा-दादी के गांव आई थी। शहर की भागदौड़, ट्रैफिक और मोबाइल की दुनिया में वह खुद को थका हुआ महसूस करती थी। गांव पहुंचते ही उसने देखा—हर चेहरे पर मुस्कान थी, हर घर का दरवाज़ा खुला था और हर इंसान एक-दूसरे का हाल पूछ रहा था।

एक सुबह दादाजी उसे खेतों में ले गए। हरी-भरी फसलें हवा के साथ झूम रही थीं। किसान मेहनत कर रहे थे, लेकिन उनके चेहरों पर संतोष साफ दिखाई दे रहा था।

अनन्या ने पूछा, "दादाजी, यहां लोगों के पास शहर जैसी सुविधाएं तो नहीं हैं, फिर भी ये इतने खुश कैसे हैं?"

दादाजी मुस्कुराए और बोले, "बेटी, खुशी बड़ी-बड़ी इमारतों में नहीं, बल्कि संतोष, अपनापन और प्रकृति के साथ जीने में होती है।"

उस दिन अनन्या ने बच्चों के साथ मिट्टी में खेला, पेड़ों की छांव में बैठकर कहानियां सुनीं, तालाब किनारे सूर्यास्त देखा और रात को खुले आसमान में अनगिनत तारों को निहारा।

जब वापस शहर लौटने का समय आया, तो उसके दिल में एक नई सोच जन्म ले चुकी थी। उसने समझ लिया कि जीवन का असली सुख केवल पैसा कमाने में नहीं, बल्कि अपनों के साथ बिताए गए पलों और प्रकृति के करीब रहने में है।

उसने तय किया कि चाहे वह शहर में रहे, लेकिन गांव की सादगी, प्रेम और शांति को हमेशा अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखेगी।

सीख:
"सच्ची खुशी वहीं मिलती है, जहां मन को शांति, रिश्तों में अपनापन और प्रकृति का साथ मिलता है। गांव की सादगी ही जीवन की सबसे बड़ी दौलत है।" 🌿🌾

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