हमारी चुपी से लोगो अच्छी गलतफेमी,फिरभी
उनकी मुस्कुराहट देख, हम भी मुसकुरा लेते है।
कोई बंधन ऐसा लगता हैं,
जिसे छूटना चाहे तो भी हम न छूट पाए ।
डोरी जो किसमत ने जोड़े,
कोन वो तोड़ पाए बताओ कोई हमे।
न जाने वो हमारी चुपी की वजह, न हम बताये
कृष्ण संग हमारी चुपी हार नही ,जित है हमारी ।
कृष्णसखी