एक चेहरा… एक जज़्बात…
एक चाहत… एक तमन्ना…
और… कुछ अधूरी ख़्वाहिशें।
काश अपनी वो मोहब्बत…
ये गुज़ारिश मुकम्मल हो जाती…
पर हर दुआ ...
कामिल होने के लिए नहीं होतीं।
धीरे-धीरे दिल में आग़ाज़ लेती है,
ख़ामोशी से धड़कनों में पलती है…
और फिर बस उम्रभर…
एक नाक़िस नज़्म की तरह,
तन्हाइयों में गूँजती है।