प्रेम जीवन का सबसे अहसास है, लेकिन जब यह अधूरा रह जाता है, तो यह जीवनभर का एक ऐसा नासूर बन जाता है जो हर साँस के साथ टीस देता है। जिसे हम अपनी रूह में बसा लें, जब वह तकदीर की लकीरों में न मिल सके, तो दुनिया की हर खुशी फीकी लगने लगती है।
यह कविता उस अभागे प्रेमी की दास्ताँ है, जिसने अपनी मोहब्बत को पाया तो दिल की गहराई से, लेकिन उसे अपनी बाहों में हमेशा के लिए समेट नहीं सका।
जिंदगी के वीरान रेगिस्तान में,
जब कोई उम्मीद न थी बाकी,
तुम आई थीं एक ठंडी छांव बनकर,
जैसे सूखी धरती पर पहली सावन की झांकी।
तुम्हारी हँसी में कोई जादू था ऐसा,
कि दिल ने होश अपने गँवा दिए थे,
मैंने तुम्हें सिर्फ देखा नहीं था,
मैंने अपनी हर सांस में तुम्हें बसा लिया था।
वो रास्ते, वो कॉलेज की सीढ़ियाँ,
और वो बारिश में भीगते हुए पल,
आज भी मेरी पलकों पर ठहर जाते हैं,
जैसे कल की ही तो हो ये बात और कल।
तुम्हारी उंगलियों का वो हल्का सा स्पर्श,
मेरे हाथों की लकीरों को महका जाता था,
मुझे लगता था कि खुदा ने मेरे हिस्से का,
सारा जन्नत यहीं जमीन पर बिछा दिया था।
पर ये दुनिया, ये समाज और ये रस्में,
हमारे बीच दीवार बनकर खड़ी हो गईं,
मेरी नादान उम्मीदें और तुम्हारी खामोशियाँ,
जाने क्यों इस कदर आपस में अड़ी हो गईं।
तुम्हारी आँखों में जो अनकही सी बेबसी थी,
उसे मैं वक्त रहते पढ़ न सका,
या शायद समाज के इन कठोर पहरों से,
मैं तुम्हें बचाने की जिद पर अड़ न सका।
फासले बढ़ते गए, और खामोशियाँ गहरी हुईं,
मुलाकातों का सिलसिला धीरे-धीरे थम गया,
तुमसे बिछड़ने का वो मनहूस दिन जब आया,
लगा जैसे मेरा पूरा कायनात ही थम गया।
तुम चली गईं अपने हिस्से की दुनिया की तरफ,
और मैं तुम्हारी यादों के सहारे अकेला रह गया,
दिल ने लाख समझाया कि वक्त सब भुला देता है,
पर मैं हर रोज तुम्हारी याद में चुपचाप बह गया।
अब ये रातें बहुत लंबी और काटने को दौड़ती हैं,
चाँद भी मेरी तन्हाई पर अब मुसकुराता है,
तुम्हारी खुशबू आज भी इस कमरे में बाकी है,
हर कोना तेरा नाम लेकर मुझे बार-बार रुलाता है।
जब भी कोई पुराना गीत रेडियो पर बजता है,
तेरा चेहरा मेरी आँखों के आगे तैर जाता है,
मैं खुद को संभालना चाहता हूँ लाख कोशिशों से,
पर मेरा हर एक आँसू सिर्फ तेरा ही नाम गाता है।
लोग कहते हैं कि वक्त हर जख्म को भर देता है,
पर किसी को क्या पता कि कुछ जख्म ताउम्र हरे रहते हैं,
जो तुम्हें पा न सके इस जनम में,
वे लोग बस चुपचाप जिए जाते हैं, और मरे रहते हैं।
शारीरिक दूरियां चाहे जितनी भी बढ़ गई हों,
पर मेरा रूहानी इश्क आज भी तुमसे जुड़ा है,
तुम किसी और की हो चुकी हो शायद इस दुनिया में,
पर मेरा हर एक सजदा सिर्फ तुम्हारे नाम हुआ है।
तुम पास नहीं हो, तो क्या हुआ?
तुम्हारी यादें तो हर पल मेरे साथ चलती हैं,
ये अधूरी प्रेम कहानी ही सही मेरी जान,
मेरी धड़कनों में आज भी तुम्हारी ही सांसें पलती हैं।
मैंने तुम्हें पाया नहीं, तो क्या हुआ,
तुम्हें चाहना ही मेरी सबसे बड़ी जीत है,
इस दुनिया की भीड़भाड़ में,
मेरा यह दर्द ही मेरी सबसे खूबसूरत गीत है।
अब आखिरी बार तुम्हें खुद से जुदा करता हूँ,
तुम्हारी खुशियों के लिए दुआ हजार करता हूँ,
तुम जहाँ भी रहो, आबाद रहो हमेशा,
मैं अपनी इस अधूरी मोहब्बत को ऐसे याद करता हूँ।
खुदा सलामत रखे तुम्हारी हर एक खुशी को,
चाहे मेरी किस्मत में तन्हाई ही क्यों न लिखी हो,
अलविदा मेरी अनकही मोहब्बत, अलविदा मेरी जान,
शायद हमारी ये कहानी बस इतनी ही लिखी हो।
प्रेमी का संदेश:
मोहब्बत का मुकम्मल होना ही इश्क की मंजिल नहीं है। किसी को शिद्दत से चाहना और बिना किसी शर्त के उसे उसकी मंजिल तक छोड़ देना भी प्रेम का ही एक रूप है।