एक दिन हवा बन के उड़ जाओगी
आंसू मेरे धूल में मिल जाएंगे
मेरी अस्थियां गंगा में बह जाएगी
जब मैं नहीं होगी
तब
मेरे अपने कुछ दिन तक याद करेंगे
पर
धीरे-धीरे सब भूल जाएंगे
रह जाएगी तो
बस
मेरी एक दीवार के कोने में
धूल में जम रही
एक तस्वीर
जब मुझे अपनों की जरूरत थी
तब
मेरे पास कोई नहीं था
लेकिन
मरने के बाद
मेरे पास हर कोई होगा
जीते जी तो
नहीं सूनी भगवान तूने मेरी
कम से कम
मरते मरते तो सुन ले
आखरी इबादत है तुझे मेरी
की मरने के बाद भी
मेरे शव के पास कोई ना बैठे।