वक़्त लगाओ, पर ढूँढ़ो सही इंसान, यूँ ही किसी ग़लत हाथों में मत चले जाना।
वो जो तुम्हें समझे, और ज़रूरत पड़े तो समझाए भी, तुम्हें खुद से कभी दूर न होने दे।
जो तुम्हारे सपनों को उड़ान दे, तुम्हारे मन की आवाज़ को पहचान दे, और तुम्हारे आत्मसम्मान को कभी झुकने न दे।
जो तुम्हारे लिए बोलने में हिचकिचाए नहीं, जो ज़िम्मेदारियों को "ये मेरा काम नहीं" कहकर टाले नहीं।
जो हर मोड़ पर तुम्हारे साथ चले, कदम से कदम मिलाए, और तुम्हारी जीत में उतना ही खुश हो, जितना अपनी जीत में होता है।
देर लगाना, कोई बात नहीं, पर हमसफ़र ऐसा चुनना जिसके साथ चलकर तुम खुद को खोओ नहीं, बल्कि और बेहतर पाओ।