ज़िंदगी में हर चीज़ हमारे अनुसार नहीं चल सकती, इसलिए समझदारी इसी में है कि हम चीज़ों को तीन हिस्सों में बाँट लें।
1. जो कुछ बदला जा सकता है, उसे बदलने का प्रयास करें और अपनी ऊर्जा उसे बेहतर बनाने में लगाएँ।
2. जो परिस्थितियाँ हमारे हाथ में नहीं हैं और जिन्हें बदला नहीं जा सकता, उन्हें स्वीकार करना सीखें, क्योंकि हर बात से लड़ते रहना मन को थका देता है।
3. जो परिस्थितियाँ न बदली जा सकती हैं, न स्वीकार की जा सकती हैं और लगातार भीतर अशांति पैदा करती हैं, उनसे दूरी बना लेना ही बेहतर है। हर लड़ाई लड़ना जरूरी नहीं, कभी-कभी पीछे हट जाना भी जीवन को बचाने जैसा होता है।
और अपने लिए सबसे जरूरी बात है खुद को खुश रखना। अपने आप को खुश रखना कभी न भूलें। हमारी खुशी किसी परिस्थिति, व्यक्ति या वस्तु पर पूरी तरह निर्भर नहीं होनी चाहिए। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहेंगे, लोग बदलेंगे, परिस्थितियाँ बदलेंगी और कई बार हमारी इच्छाओं के विपरीत भी बहुत कुछ होगा। लेकिन यदि हम अपने भीतर संतोष और मुस्कुराने की वजह बचाए रखें तो कठिन समय भी गुजर जाता है।
याद रखिए, आप हैं तो ही सब कुछ है इसलिए दुनिया को संभालने से पहले अपने आपको को संभालिए और हर हाल में स्वयं को खुश रखने की कोशिश कीजिए।