आज एक पुरानी किताब के पन्ने पलटते हुए ज़िंदगी का एक बेहद कड़वा और मुकम्मल सच सामने आया, जिसने सोचने पर मजबूर कर दिया।
किताब की ये लाइनें सीधे दिल में उतर गईं:
'इस दुनिया का दस्तूर भी कितना अजीब है... यहाँ अगर आप शीशे की तरह साफ़ और पारदर्शी रहेंगे, तो लोग आपको तोड़कर चले जाएँगे। और अगर आप ज़रा से धुंधले या रहस्यमयी हुए, तो लोग आपको अकेला छोड़ देंगे। इस मतलबी दुनिया में मुकम्मल सुकून और हिफ़ाज़त सिर्फ एक ही चीज़ में है—अपनी रूह से वफ़ादार रहना और अपने खुदा पर यकीन रखना।'
वाकई, आज के दौर में इससे गहरी बात और कुछ नहीं हो सकती।"