परिवेश सुरक्षा
धरती माँ की पुकार सुनो,
पेड़ों का भी अधिकार सुनो।
नदियाँ रोतीं, पर्वत थकते,
अब तो प्रकृति का सार सुनो।
एक-एक पौधा जीवन देगा,
हरियाली से आँगन सजेगा।
स्वच्छ हवा का हर एक झोंका,
जीने का विश्वास बनेगा।
प्लास्टिक का उपयोग घटाएँ,
नदियों को फिर स्वच्छ बनाएँ।
जल की हर बूँद अमृत जैसी,
मिलकर उसका मान बढ़ाएँ।
पक्षी, पशु और वन के जीव,
इनसे ही है जीवन जीवंत।
इनकी रक्षा करना सीखें,
यही हमारा सच्चा व्रत।
आओ मिलकर प्रण यह लें,
धरती को फिर हरा करेंगे।
स्वच्छ, सुंदर, सुरक्षित पर्यावरण,
आने वाली पीढ़ी को देंगे।
- Skp devine