“अपना अलग पहचान”
मैं अपना एक अलग पहचान चाहता हूं
न ही दूसरों के चाहा हुआ,
मैं अपना आजादी चाहता हूं
मुझे नहीं पसंद झूठी अच्छाई दिखाना।
मुझे साधारण और हल्की जिंदगी नहीं चाहिए
किसी से प्रेम करना हो या,
साथ निभाने की वादा करना
यह सब मेरे लिए संभव नहीं।
मैं इस नकली दिखावे की
घिसी–पीटी दुनिया से ऊब गया हूं,
खुदको बार बार साबित करना जरूरी नहीं
जरूरी नहीं किसी को चिल्ला–चिल्ला समझना।
मैं मनमुक्त हो कर सोना चाहता हूं
नकली दुनिया की उलझनों से दूर,
मैं दूसरों से अलग बनना चाहता हूं
जाति और धर्म से बेहत दूर।
नहीं मानता मैं ईश्वर को
न ही मानता हूं में खुदा को
क्योंकि मुझे मानने से ज्यादा
जानना और सवाल उठाना पसंद है।
मेरा स्वभाव अंधविश्वास में झुकना नहीं
बल्कि उसे पड़ख कर समझना है
मैं इस दुनिया से थक गया हूं
मैं बस अपना अलग पहचान चाहता हूं।