मैं और मेरे अह्सास
ज़मीन
दो गज ज़मीन के लिए सारी भेजामारी हैं l
सब की जन्म से ले मौत तक की सवारी हैं ll
जिंदगी में सुख दुख का चक्र चालू रहता है l
सुख के बाद दुख ओ फ़िर सुख की बारी हैं ll
अपनी जी जान लगा देता पालनपोषण में तो l
बागबान की मेहनत से खिली हुई क्यारी हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह