मैं और मेरे अह्सास
मुस्कान
खूबसूरत हसीन मुस्कान पर ज़मीर हार गया l
दिलों जान हुस्न ए मल्लिका पर वार गया ll
दिन दहाड़े गहरी नींद में सोया पड़ा था कि l
ख्वाबों में चाँद सितारों के उस पार गया ll
दो घड़ी की मुलाकात की बात हुई थी और l
सुकून के पल छीन के इतवार मार गया ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह