मैं और मेरे अह्सास
मुस्कान
एक नशीली मुस्कान से दूर हो गई सारी थकान हैं l
खूबसूरत हुस्न की मल्लिका की प्यारी सी
मुस्कान हैं ll
कितने दिनों के चाँद सितारों से घर आँगन
रोशन हुआ ll
कायनात में रंगते छाई की लगता है ख़ुदा भी
मेहरबान हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह