किसने कहा में अकेली हूं
मेरा साथ देने के लिए........
माता पिता की उम्मीदों का भार मेरे कंधों पर है।
रिश्तेदारों के थोक के भाव बिकते ताने है।
overthinking करने के लिए दुनियां जहां की बाते हैं।
उचित जीवनसाथी नहीं मिलने का भय है।
भविष्य बनाने की आग हृदय में झुलस रही है।
खुद को दूसरों से नीचा समझने का full confidence है।
खाली कमरे में पड़ी किताबों में भटकती मेरी आत्मा है।
कूलर की खड़ - खड़ आवाज में आई गहरी मीठी नींद मेरे साथ है।
किसने कहा में अकेली हूं।
✍️ अंतिमा 😊