पाखन्डि
तू चिन्ता मत कर जब तक जियेगे भण्डार रहेगा।
ऐसा जाल बिखेरा है इस बार जो मानेग वो इस दल-दल मे फसता जायेगा | पहले तो हम इनकी एकता में फूट डलवाते है। पत्नी जैसे - पति ' भाई-भाई मे ये देते है तुम्हारे घर मे किसी अपने ने झाडफूक करा दी है। घर ही घर साथ निभाने की जगह दूर दूर का फासला बना देता है। गन्डा - ताबीज - तन्त्र मन्त्र घर मे - धुआ करना ऐसा मन मे बैठा देते है । झगड़ा कर के भी वो हमारी बात मानेगा । पत्नी - पर ये तो गलत है। जिसे कुछ होता नही उसे करवाला पत्नी , पैसा आने से मतलब लोग देखो मरीज का डॉक्टर इलाज भी कराते है । ऊपर की हवा है। हम जैसे लोगों के पास भी आते हैं | कैसा वेवकूफ बनता है। बिमारी कुछ और रिर्पोट दिखाती कुछ और डॉम्टर इलाज मैसे सही चलेगा | परिवार का एक सदस्य ह्वी फस जाये वोही बहुत है । घण्टों - घण्टो पूजा करता रहता है । मन्त्रों का जाप करता रहता है । चाहे . दुकान चौपट हो जाये ऐसो भहम री बिमारी लगती है। हमारे रहने पर हर हाल मे बात मानता है हम से उपाप पूछते है l भविष्य के बारे . मे जो हम बताते है मानते है। भविष्य तो, हमने खुद अपना नही जाना दुसरो को केसे बता सकते हैं | हार्ट अटैर आया लीला खत्म हसंते हुए पांडितजी जब दुकान पर बैठता नही तो दुकान कैसे चलेगी कर्ज कर लेता है। . पर हमारे जाल मे फंसा रहता है औरत तो ओर जल्दी बातो मे आती है। जिस के मन मे वैसी बात वैसा बता हो सामने वाला खुश हमारी जेब गरम ।