आज अपनी डायरी में संघर्ष के पन्नों को समेटते हुए यह महसूस किया..."
"हारने वाला मैदान में नहीं, अपनी सोच में हारता है। और जीतने वाला जीत की फ़िक्र नहीं करता, क्योंकि वह जानता है कि उसका 'संघर्ष' ही उसकी जीत का प्रमाण है।"
मेरी राय:
जब आप नतीजे (Result) की चिंता छोड़कर प्रक्रिया (Process) से प्यार करने लगते हैं, तो जीत आपके लिए एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक हकीकत बन जाती है। जीतने वाले को पता होता है कि वह जीत रहा है, क्योंकि उसने हार माननी छोड़ दी है।
good night sweet dreams take care all frnds