आज मैं महान लेखक और दार्शनिक मार्कस ऑरेलियस (Marcus Aurelius) की विश्व प्रसिद्ध कृति 'The Meditations' पढ़ रहा था, उनकी ये लाइनें मुझे बहुत सटीक लगीं:
"समझदारी इस बात में नहीं है कि तुम दुनिया की हर उलझन को सुलझाओ, बल्कि समझदारी इसमें है कि तुम उस शोर के बीच भी अपने भीतर की शांति को न खोने दो।
तुम्हारे जीवन की गुणवत्ता तुम्हारे विचारों की गहराई पर निर्भर करती है।"
वाकई, मन का बोझ कम करने का इससे बेहतर तरीका और कोई नहीं कि हम उन चीज़ों को स्वीकार कर लें जिन्हें हम बदल नहीं सकते।