उनकर नाम के रौशनी हमार आँखिन में चमक लावेला,
होठन के मुस्कान हमार हियरा के झुमावेला।
गावेला मन, जब-तब पुरवइया से केहू बोलावेला,
निरखेला मन मोर उनकर मुखड़ा,
कोइलर स्नेह गीत सुनावेला।
धड़केला छतिया, जब-तब रह-रह आग सुलगावेला,
हरियर-पीयर सब रंग फिका पड़ जाला—
लाल गमछिया, अइंठल मूंछ,
चाँद नियन चेहरा उनकर,
कागज नियन देह गोर,
हमार जियरा सगरी डोलावेला।
मोहे लागे तन मोर, शीतल छाँव पिया के,
बाकिर उनकर प्रीतिया हाथ ना आवेला।