चाँद उतरे अंगना में तोहार,
दिन जब बीते अँजोरिया रात हो।
सितारन के बीच-बीच,
अंतर्दर्पण में तोहसे ही मुलाकात हो।
न होखे शिकायत तोहरा जिनगी से,
आसमा के सातों रंग तोहार सौगात हो।
खिल उठे फूलन संग डाली भी,
जब दुअरा पे साजत तोहार बारात हो।
गली-गलईचा, बाग-बगइचा संग,
खेतन के आरी-ताड़ी भी झूमे,
जब-जब तोहर बात हो।
बढ़े उमिर संग खुशियाँ,
हीया से हुलसत—
राजा के माथा पे,
ईश्वर के हाथ हो
@softrebel