दुआओं का सफ़र
किसी के दिल की धड़कन में, कोई पैगाम रहता है,
मगर लब सिल गए जिनके, वहीं कोहराम रहता है।
हज़ारों महफ़िलें देखीं, हज़ारों लोग देखे हैं,
मगर इस रूह के आँगन में, बस आशीष रहता है।
न पूछो हाल मेरा तुम, कि बस तुमको ही चाहा है,
तुम्हारी याद की छाँवों में, अपना घर बनाया है।
ज़माना लाख समझाए, कि ये सब एक धोखा है,
मगर मैंने तो सजदों में, तुम्हें अपनी दुआ पाया है।
यहाँ सब लोग कहते हैं, कि चाहत एक बाधा है,
मगर इस एक बाधा में, समर्पण भी तो आधा है।
जो अपनी आँखों के पानी को, मोती मान बैठा हो,
उसे फिर क्या डराएगा, कि दरिया और गहरा है।
सफ़र जो साथ शुरू किया, उसे पूरा भी करना है,
दिलों की इस इबादत का, यहाँ मान रखना है।
लिखे जो दास्ताँ अपनी, जुनून-ए-इश्क़ के दम पर,
उसके हर एक कदम पर फिर, खुदा का आशीष रहना है।
Adv.आशीष जैन
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फिरोजाबाद