सपनों में हर रात कोई कहानी निकलती है,
दिल की फ़ाइलों से दबी ज़िंदगानी निकलती है।
ख़्वाबों की बारिश में भीगते हैं यादों के पल,
सूखी सी आँखों से फिर रवानी निकलती है।
कुछ समझ न आया था उन अधूरे लम्हों का,
सोचते हैं तो कोई निशानी निकलती है।
फ़ाइल में दबे रहे कई अरमान बरसों तक,
खोली जो यादें तो एक कहानी निकलती है।
अधूरी सी लगती थी जो सपनों की राह कभी,
चलते चलो तो वही ज़िंदगानी निकलती है।
कौशिक दिल के काग़ज़ पर लिखता रहा ख्वाबों को,
तभी तो हर शेर में एक कहानी निकलती है।