प्रेम मेरा..
किसी दिन, तिथि या जगह का मोहताज नहीं,
ये तो वो अविरल धारा है जो..
लगातार मुझमें बहती रहती है..
कभी खुशियों की लहर तो
कभी दर्द की धारा बन..
कभी नाराजगी के थपेड़े तो..
कभी खामोशी ठहरे पानी सी बन..
बस बहती रहती अविरल.. 'मुझमें '
- Soni shakya