सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ ।
वन्दे विशुद्धविज्ञानौ
कवीश्वरकपीश्वरौ ।।
शब्दार्थ (एक-एक शब्द का अर्थ):
सीताराम – सीता और राम (भगवान राम और माता सीता)
गुणग्राम – गुणों का समूह / सद्गुणों की भीड़
पुण्यारण्य – पुण्य से पवित्र हुआ वन / पावन वन
विहारिणौ – विचरण करने वाले (द्विवचन – दो व्यक्तियों के लिए)
वन्दे – मैं वंदना करता हूँ / प्रणाम करता हूँ
विशुद्ध – पूर्णतः शुद्ध / निर्मल
विज्ञानौ – ज्ञानस्वरूप दोनों / दिव्य ज्ञान से युक्त (द्विवचन)
कवीश्वर – श्रेष्ठ कवियों के ईश्वर / वाणी के अधिपति
कपीश्वरौ – वानरों के स्वामी (श्रीराम और हनुमान के रूप में) / वानरराज
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सरल हिंदी अनुवाद:
मैं उन सीता और राम की वंदना करता हूँ, जो गुणों के समूह से युक्त हैं, पुण्य से पवित्र वनों में विचरण करते हैं,
जो पूर्णतः शुद्ध ज्ञानस्वरूप हैं, श्रेष्ठ कवियों के अधिपति और वानरों के स्वामी हैं।