Hindi Quote in Poem by Abhi Mahanand

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Ch 1 - रक्तमय रात






* EPISODE एक — रक्तमय रात

* एक. अरण्य की गहराई*

आर्यादेश के दक्षिणी छोर पर फैला* अरण्यपथ* एक ऐसा जंगल था जहाँ सूरज की रोशनी भी पेडों से लडते- झगडते नीचे आती थी.
रात का समय.
हवा में ठंडक, पर किसी अनजानी गर्म राख की गंध भी.

तेजस अपने पिता के पीछे चल रहा था.
उसके कंधे पर लकडी का छोटा सा गट्ठर बँधा था, और हाथ में छोटी बहन यशोदा की उँगलियाँ कसकर पकड रखी थीं.

भैया. ये हवा ऐसे क्यों चल रही है? जैसे कोई फूँक मार रहा हो.
यशोदा की आवाज काँप रही थी.

तेजस ने उसकी हथेली दबाई और मुस्कुराया,
तू बस मेरे पास चल. कुछ नहीं होगा।

पर तेजस खुद भी डरा था.
जंगल आज कुछ* अजीब* था—
पत्ते हिल रहे थे पर हवा नहीं चल रही थी.
झाडियों में खडखडाहट थी, पर कोई जानवर नहीं दिख रहा था.
जैसे पूरा जंगल किसी* तूफान से पहले की सांस* ले रहा हो.

माँ ने पीछे मुडकर कहा,
तेजस, यशोदा को और कसकर पकड. रात गहरी हो रही है।

पिता के कदम असामान्य रूप से तेज थे.
उन्होंने एक हाथ में मशाल और दूसरे हाथ में अपनी पुरानी तलवार पकडी हुई थी.

तेजस ने यह पहली बार देखा:
पिता की तलवार* कंप रही थी* तलवार तब ही काँपती थी जब हवा में दैत्य- शक्ति मौजूद हो.



* दो. डर की पहली दस्तक*

कहीं दूर से एक लंबा, काँपता हुआ साया हिला.
पेड ऐसी आवाज कर रहे थे जैसे कोई भारी चीज उनपर घिसट रही हो.

कडकड. टप्प!

यशोदा सहम कर तेजस की बाँहों में छिप गई.
तेजस ने दप से मशाल उठाई और चारों तरफ रोशनी फैलाई—
अँधेरा तुरंत निगल गया.

माँ ने धीमे स्वर में कहा,
ये जगह ठीक नहीं. हमें जल्दी करना चाहिए।

पिता बोले,
कुछ हमारे पीछे चल रहा है. मैं उसकी साँसें महसूस कर रहा हूँ. ये साधारण जानवर नहीं.

पिता की बात पूरी होती इससे पहले ही—
आवाज आई।

एक ऐसी दहाड.
जिसमें आग, दर्द, और घृणा तडप रही थी.
धरती थरथरा उठी.

यशोदा चिल्लाई—
भैया. वो क्या था?

तेजस के कान बज उठे थे.
दहाड सिर्फ आवाज नहीं थी—
वो किसी* दैत्य की पुकार* थी.



* तीन. पहला दैत्य प्रकट*

अचानक पेडों की ऊंचाई पर एक भारी काला साया दौडता हुआ दिखाई दिया.
पूरा पेड एक झटके में टूटकर गिर पडा.

धडाम!

टूटे पेड की धूल हटते ही एक राक्षस दिखा—
तीन मीटर ऊँचा, काले धुएँ से बना हुआ,
लाल दहकती आँखें, दाढी जैसी जलती राख,
और शरीर पर दरारें जैसे कोई पिघला हुआ लावा जम गया हो.

उसकी साँसें गर्म लोहे जैसी थीं.

माँ डरकर पीछे हट गईं.
यशोदा ने मुँह ढक लिया.
पिता आगे बढे—
भागो! मैं इसे रोकूँगा!

पर दैत्य ने उनकी तरफ देखा और उसके होंठ फटकर खुल गए.
वह हँसा—
एक ऐसी हँसी जो इंसान के सीने को चीर दे.

खून. आग. और डर.
उसकी आवाज जले हुए लोहे जैसी थी.
रुद्राक्ष- सम्राट को चाहता खून. तुम्हारा परिवार उसके लिए चुना गया है।

तेजस दंग रह गया—
रुद्राक्ष? कौन? क्यों?

पर सवाल पूछने का समय नहीं था.



* चार. हमला*

दैत्य बिजली की गति से पिता पर झपटा.
पिता ने तलवार घुमाई—
चिंगारियाँ उडीं.
पर दैत्य ने उन्हें एक हाथ से उठाकर धडाम से जमीन पर पटक दिया.

माँ चीखीं—
नहीं!

तेजस का शरीर सन्न रह गया.
उसके पैरों ने हिलने से इंकार कर दिया.

पर यशोदा रोते हुए बोली—
भैया कुछ करो!

तेजस ने साहस जुटाया,
एक बडा पत्थर उठाया और दैत्य पर फेंका.
पत्थर उसके कंधे से टकराया.

दैत्य मुडा.
उसकी पूरी नजर अब* तेजस* पर थी.

आहाहा. यही है वो लडका.
उसने कहा,
जिसे सम्राट रुद्राक्ष चाहता है. अग्नि- चिह्न का वाहक.

तेजस दंग—
अग्नि- चिह्न?
वह कभी किसी के शरीर पर कुछ निशान नहीं देखता था.
ये दैत्य क्या बकवास कर रहा था?

दैत्य ने उसके चेहरे को पकडने के लिए हाथ बढाया.
तेजस ने बहादुरी से कदम पीछे लिया, पर दैत्य की पकड बहुत तेज थी.

पिता घायल अवस्था में उठे—
तेजस, भाग!

पर तेजस ने बहन को पीछे धकेलते हुए कहा—
मैं उसे आने नहीं दूँगा!

यही वह क्षण था—
जब तेजस की जिंदगी बदलने वाली थी.



* पाँच. अग्नि- चिह्न का जागरण*

तेजस ने दैत्य की कलाई को दोनों हाथों से पकड लिया.
दैत्य मुस्कुराया—
छोटे मानव. तुझमें क्या ताकत—”

वह बात पूरी कर ही रहा था कि.

तेजस की छाती पर कुछ* गर्म* जलने लगा.
जैसे उसका खून किसी धधकती आग में बदल गया हो.

उसकी सांसें गर्म होने लगीं.
आँखों के सामने लाल- पीली चमक.
कानों में आग की फूँफकार.

और अचानक—
उसकी छाती पर एक चमकदार* अग्नि- चिह्न* उभर आया!
गोल, घूमता हुआ, चारों तरफ लौ जैसी रेखाएँ.

दैत्य पीछे हट गया—
ये. ये आग- वंश का चिह्न है?

तेजस को खुद नहीं पता क्या हो रहा है.
उसके हाथों से गर्मी निकल रही थी.
पैरों के आसपास राख उडने लगी.

फिर—
उसके शरीर से पहली बार* अग्नि- विस्फोट* निकला!

धडाम!

तेजस के चारों तरफ हवा जल सी उठी.
दैत्य कई कदम पीछे फेंका गया.
पत्ते जल उठे.
धरती लाल पड गई.

यशोदा स्तब्ध थी—
उसने अपने चौदह वर्षीय भाई को ऐसा कभी नहीं देखा था.

माँ ने डर और आश्चर्य के बीच कहा—
ये. ये तो अग्नि- वंश की दैवी शक्ति है.

पिता ने कांपते हुए साँस ली—
मैंने तो सोचा था ये शक्ति नष्ट हो चुकी है.

तेजस भी घबरा गया.
उसे लगा वह खुद जल जाएगा.
उसके हाथ काँप रहे थे.
आँखों में आग झिलमिला रही थी.

पर दैत्य अब और क्रोधित था.

तुझमें चिह्न जाग गया. इसका मतलब है तेरा खून बहुत कीमती है!



* छह. यशोदा का श्राप*

दैत्य पागल की तरह झपटा—
लेकिन इस बार सीधे* यशोदा* पर.

तेजस चिल्लाया—
नााऽऽह!

पर दैत्य ने अपनी लंबी, काली, धुएँ भरी जिह्वा लडकी की गर्दन पर रख दी.
काला धुआँ उसके शरीर में दाखिल होने लगा.

यशोदा ने दर्द में तडपकर चीख मारी.
उसकी नसें काली पडने लगीं.
आँखें नीली से गहरी जामुनी होने लगीं.
दाँत तेज होने लगे.

वह अर्ध- दैत्य बनने लगी थी।

तेजस रोता हुआ बहन की ओर भागा—
यशोदा! छोड उसे!

पर दैत्य ने उसे धक्का देकर दूर कर दिया.
तेजस मिट्टी में लुढक गया, पर उठा तुरंत.

यशोदा के माथे पर काला चिह्न उभर आया.
वह बेहोश होकर गिर गई.

दैत्य ने कहा—
अब ये लडकी हमारी है. रुद्राक्ष सम्राट इसे अपने दाहिने हाथ की तरह इस्तेमाल करेगा।

तेजस टूट गया.
इससे अधिक दर्द उसने कभी महसूस नहीं किया था.



* सात. परिवार का अंत*

पिता दैत्य पर टूट पडे—
पर दैत्य ने उन्हें पकडकर पेड से दे मारा.
उनकी साँसें उसी क्षण थम गईं.

माँ उनकी ओर दौडीं,
पर दैत्य ने उनके सीने पर वार कर उन्हें भी गिरा दिया.

तेजस के सामने—
उसका पूरा परिवार, खून में लथपथ.

उसने चीखते हुए दैत्य पर झपट्टा मारा.
पर दैत्य ने सिर्फ एक ठोकर मारी—
तेजस फिर गिर पडा.

जब तू बडा होगा. तो तेरे अंदर का अग्नि- चिह्न पूर्ण जागेगा.
तब हम तुझे खुद लेने आएँगे।

दैत्य हँसा.
और अपने साथियों के साथ अंधेरे में गायब हो गया.

सिर्फ खून.
टूटे पेड.
और राख की गंध पीछे छूट गई.

तेजस घुटनों पर गिर गया.
उसने बहन के सिर को अपनी गोद में रखा.

आँसू जमीन पर टपकते रहे.
उसने टूटी आवाज में कहा—

मैं तुम्हें नहीं खोऊँगा, यशोदा.
तू दैत्य नहीं बनेगी.
मैं तुझे वापस लाऊँगा.
और पूरे दैत्य- कुल का अंत करूँगा.
ये तेजस की प्रतिज्ञा है।

उसी समय—
कदमों की भारी आहट आई.

एक लंबा, विशालकाया व्यक्ति तलवार हाथ में लिए अँधेरे से निकला.

उसकी आँखों में साहस, चेहरे पर चोटों के निशान.
वह था—

* गुरु ध्रुव — दानव- वध संघ का महान योद्धा*

ध्रुव ने जमीन पर पडे परिजनों को देखा.
यशोदा के शरीर से उठते काले धुएँ को महसूस किया.
और तेजस के अग्नि- चिह्न को पहचान लिया.

उन्होंने धीरे से कहा—

लडके. तेरे अंदर आग है.
तू रुद्राक्ष का दुश्मन बनेगा.
अगर बदला चाहिए. तो मेरे साथ चल।

तेजस ने आखिरी बार माँ- पिता को देखा.
बहन को अपनी गोद में उठाया.
और खून से भरी आँखों में एक नई आग चमक उठी.

वह उठ खडा हुआ.

मैं सीखना चाहता हूँ.
मैं दैत्य- वध चाहता हूँ.
मैं रुद्राक्ष का अंत चाहता हूँ।

ध्रुव ने सिर हिलाया.
तो फिर अग्नि- पथ पर चलने के लिए तैयार हो जाओ।

और इस तरह—
अग्नि- वंश का अंतिम वंशज जन्मा.
तेजस अरण्यवी

Hindi Poem by Abhi Mahanand : 112014089
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