गौ नीति : भारतीय नस्ल के गौ-धन को सरंक्षित करने के लिए प्रस्तावित क़ानून
(Gau Neeti : Proposed Notification to Protect Indian Cow )
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(इस क़ानून ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ एवं अन्य सम्बंधित जानकारी के लिए इस पोस्ट के पहले 3 कमेन्ट देखें। पीडीऍफ़ पेम्पलेट छपवाने और मोबाईल पर पढने के फोर्मेट में है।)
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इस कानून का सार : इस क़ानून के गेजेट में आने से देशी गाय की हत्या में कमी आएगी और गौ वंश का सरंक्षण होगा। इस कानून को विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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“मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित गौ रक्षा क़ानून को गेजेट में छापें - #GauNeeti , #P20180436111 #VoteVapsiPassBook ,
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======क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
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टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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(I) नागरिको के लिए निर्देश :
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(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर राज्य के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निचे दिए गए अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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1. गौ रक्षा अधिकारी ( Dy S.P. - Cow Protection Cell Incharge )
2. गौ कल्याण मंत्री ( Cow Welfare Minister )
3. जूरी प्रशासक ( Jury Administrator )
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है।
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(02) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। निचे दिए गए मामले जूरी ड्यूटी के दायरे में आयेंगे :
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(2.1) गौ रक्षा अधिकारी, गाय मंत्री, जूरी प्रशासक एवं उनके स्टाफ से सम्बंधित सभी प्रकार की नागरिक शिकायतें।
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(2.2) गौ वंश की तस्करी, गौ हत्या एवं देशी गाय से संबधित सभी प्रकार के मुकदमें।
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(2.3) देशी गाय के उत्पादों में जर्सी या अन्य नस्लों की गायों के उत्पादों की मिलावट को रोकने वाले कानूनों का उलंघन करने की शिकायतें।
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जूरी मंडल का चयन लॉटरी से किया जाएगा, मुकदमे की गंभीरता को देखते हुए जूरी मंडल में 15 से 1500 तक सदस्य हो सकेंगे। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत आदि देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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(03) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, तो अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (15.1) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर शपथपत्र स्वीकार करेगा, और शपथपत्र को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
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भाग (II) : नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश :
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[ टिप्पणी 1 : इस क़ानून में गाय शब्द से आशय है देशी गाय एवं उसका वंश। इस क़ानून में गौ रक्षा अधिकारी से आशय है, वह जिले का वह पुलिस अधिकारी जिसके पास गौ प्रकोष्ठ ( Cow Protection Cell ) का चार्ज है। ]
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टिप्पणी 2 : गौ कल्याण मंत्री / मुख्यमंत्री यह क़ानून पास होने के 180 दिनों के भीतर निम्नलिखित बिन्दुओ का निष्पादन करने के लिए नोटिफिकेशन निकालेंगे जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जाएगा ]
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(4.1) मुख्यमंत्री एक गौ कल्याण मंत्री की नियुक्ति करेंगे। गाय मंत्री राज्य में देशी गाय या भारतीय नस्ल की गाय के सरंक्षण एवं देशी गाय के सभी उत्पादों आदि को बढ़ावा देने के लिए नीति-निर्धारण, प्रबंधन एवं नियमन करेगा।
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(4.2) मुख्यमंत्री प्रत्येक जिले में एक गौ प्रकोष्ठ ( Cow Protection Cell ) की स्थापना करेंगे। इस प्रकोष्ठ का मुखिया पुलिस उप अधीक्षक या सहायक अधीक्षक स्तर का पुलिस अधिकारी होगा, जो कि गौ रक्षा अधिकारी कहलायेगा। मामलों की संख्या को देखते हुए किसी जिले में इसके लिए अलग से अधिकारी नियुक्त किया जा सकता है, या फिर किसी उप अधीक्षक को इसका अतिरिक्त चार्ज दिया जा सकता है। किन्तु यदि गौ रक्षा अधिकारी नागरिको की स्वीकृति से नियुक्त किया गया है तो वह सिर्फ गौ प्रकोष्ठ का कार्य ही करेगा।
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(4.3) मुख्यमंत्री प्रत्येक जिले में एक जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। जूरी प्रशासक गौ वंश से सम्बंधित शिकायतों एवं मुकदमो की सुनवाई के लिए जूरी मंडलों के गठन एवं संचालन का कार्य करेगा।
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(05) गौ वंश का परिवहन
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(5.1) गायो के परिवहन के लिए सिर्फ जालीदार वाहनों का ही उपयोग किया जाएगा। इन वाहनों पर गौ परिवहन यान लिखा रहेगा और सिर्फ इन्ही वाहनों में गायो को ले जाया जा सकेगा।
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(5.2) गौ वंश को किसी निचे दिए गए राज्यों में ले जाने पर पाबंदी रहेगी :
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5.2.1. यदि अमुक राज्य में गौ कशी कानूनी है
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5.2.2. यदि अमुक राज्य में इस तरह का कोई क़ानून नहीं है जो ऐसे राज्यों में गौ परिवहन पर प्रतिबन्ध लगाता है जिन राज्यों में गौ कशी कानूनी है।
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यदि कोई व्यक्ति ऐसे राज्यों में गौ वंश को ले जाता पाया जाता है तो मुख्यमंत्री अभियुक्त को पाँच वर्षों तक की सजा देने का क़ानून बना सकते है।
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(6) गौ शालाओं की स्थापना एवं उनका संचालन :
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(6.1) गौ कल्याण मंत्री तहसील स्तर पर गौ-शालाओ के संचालन के लिए नीति बनाएगा एवं यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक तहसील में गौ शालाओ का विधिवत संचालन हो। आवश्यकता अनुसार शहरों में 10,000 से 30,000 आबादी की प्रत्येक बस्ती में एवं पंचायत स्तर पर भी गौ शालाए खोली जा सकती है। इन गौ शालाओं को जो भी दान देगा उसे टेक्स में कोई छूट नहीं मिलेगी। गौ शालाएं बूढ़ी गायों को एक निर्धारित कीमत पर खरीदेगी।
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(6.2) राज्य सरकार भारतीय नस्ल की गायों का निषेचन जर्सी सांडो से करने के लिए चलायी गयी सभी योजनाओ को बंद करेगी तथा भारतीय नस्ल की गायों का गर्भाधान देशी नस्ल के उन्नत सांडो से करवाने को प्रोत्साहन देगी। यदि प्राइवेट कम्पनियां या निजी व्यक्ति जर्सी सांडो का इस्तेमाल देशी गायों के गर्भाधान में करते है तो इस पर कोई रोक नहीं होगी। सरकार शुक्राणु-विभाजन की प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिये पूंजी निवेश करेगी ताकि सांड की पैदावार कम की जा सके।
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(6.3) मुख्यमंत्री मंदिरों को राज्य सरकार के नियंत्रण से मुक्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए नोटिफिकेशन निकालेंगें ।
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(7) गौ उत्पादों को प्रोत्साहन एवं सरंक्षण
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(7.1) डेयरी उद्योगों एवं दूध विक्रेताओ को अपने दूध के डिब्बे या बोतल पर स्पष्ट रूप से यह अंकित करना होगा कि इसमें जो दूध है वह देशी गाय का है या वर्ण संकर प्रजाति का । दूध विक्रेता अपनी गायों की नस्ल की शुद्धता के लिए विभाग से सर्टिफिकेट ले सकेंगे एवं छोटे पशुपालक अपनी गायों की नस्ल की शुद्धता का सेल्फ सर्टिफिकेट जारी कर सकेंगे। गाय मंत्री इन स्व घोषित सर्टिफिकेट को अनुमोदित करेगा।
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(7.2) यदि कोई विक्रेता अपने दूध पर देशी गाय के दूध का चिन्ह अंकित करता है और उसमे 5% से अधिक मिलावट पायी जाती है तो उस पर आर्थिक दंड या लाइसेंस का रद्दीकरण किया जाएगा। देशी गाय के उत्पादों से सम्बंधित सभी मामलो में मिलावट आदि की सुनवाई भी नागरिको की जूरी करेगी। देशी गाय के दूध के अन्य उत्पादों जैसे पनीर, घी आदि पर भी यही नियम लागू होंगे।
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(08) गाय का चमड़ा बेचने पर प्रतिबन्ध लगाया जाएगा। मृत गाय को दफनाया जायेगा या जलाया जायेगा। जूतों / बेग आदि के निर्माता अपने उत्पादों पर हरा गो-हत्या मुक्त लेबल लगा सकेंगे, जिसका मतलब होगा कि चमड़ा जिस पशु से आया है, उसकी प्राकृतिक मृत्यु हुई है और उसका मांस खाने के लिए प्रयोग नहीं किया गया था।
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(09) अधिकारियों द्वारा आवेदन एवं योग्यताएं :
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(9.1) गौ रक्षा अधिकारी के लिए : यदि 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक जो पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए किसी जिले में पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, तथा जिसने 5 वर्षों से अधिक समय तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो अथवा उसने राज्य लोक सेवा आयोग या संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, अथवा उसने विधायक या सांसद या पार्षद या जिला पंचायत के सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति गौ रक्षा अधिकारी के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
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(9.2) गौ कल्याण मंत्री के लिए : 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक राज्य का गौ कल्याण मंत्री बनने के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(9.3) जूरी प्रशासक के लिए : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो एवं उसे LLB की शिक्षा पूर्ण किये हुए 5 वर्ष हो चुके हो तो वह जिला जूरी प्रशासक पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(10) धारा 09 में दी गयी योग्यता धारण वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से ऐफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा शपथपत्र को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
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(11) मतदाता द्वारा प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए "हाँ" दर्ज करना
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(11.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर गौ रक्षा अधिकारी गाय मंत्री एवं जूरी प्रशासक के प्रत्याशियों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(11.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(11.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा ।
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(11.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा। गाय मंत्री की स्वीकृतियों का प्रदर्शन राज्य के कैबिनेट सचिव द्वारा भी किया जाएगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
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(12) गौ कल्याण मंत्री एवं गौ रक्षा अधिकारी की नियुक्ति एवं निष्कासन
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(12.1) गौ रक्षा अधिकारी के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने स्वीकृति दर्ज की है ) के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन गौ रक्षा अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए गौ रक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकते है।
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(12.2) गौ कल्याण मंत्री के लिए : यदि राज्य की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन गौ कल्याण मंत्री से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को गौ कल्याण मंत्री नियुक्त कर सकते है।
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(12.3) जूरी प्रशासक के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन जूरी प्रशासक से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जिला जूरी प्रशासक की नौकरी दे सकते है।
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(13) जिला महाजूरी मंडल = डिस्ट्रिक्ट ग्रेंड ज्यूरी का गठन
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(13.1) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(13.2) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महा जूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
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(13.3) यह महाजूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को बैठक करेंगे। बैठक सुबह 11 बजे से पहले शुरू हो जानी चाहिए और बैठक सांय 5 बजे तक चलेगी। जूरी सदस्यों को प्रति उपस्थिति 500 रू एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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(14) शिकायतों एवं मुकदमो का जूरी द्वारा निपटान
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[ टिप्पणी : मुख्यमंत्री जूरी मंडल के गठन एवं संचालन के लिए आवश्यक विस्तृत प्रक्रियाएं गेजेट में प्रकाशित करेंगे, जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जायेगा। मुख्यमंत्री के अलावा कोई अन्य मतदाता भी इसी क़ानून की धारा 15.1 का प्रयोग करते हुए ऐसी आवश्यक प्रक्रियाएं जोड़ने का शपथपत्र दे सकता है। ]
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(14.1) धारा 02 में दिए गए सभी मामले जूरी मंडल द्वारा सुने जायेंगे। वादीगण अपने मामले की शिकायत सम्बंधित जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल के सदस्य मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है । यदि महाजूरी मंडल के अधिकांश सदस्य मानते है कि शिकायत बिलकुल आधारहीन और मनगड़ंत है तो वे मामले की सुनवाई में हुई समय की बर्बादी के लिए 5000 रूपये प्रति घंटे अधिकतम की दर से जुर्माना भी लगा सकते है।
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(14.2) यदि महाजूरी मंडल शिकायत स्वीकार कर लेता है तो महाजूरी मंडल मामले की सुनवाई करेगा। महाजूरी मंडल चाहे तो खुद सुनवाई कर सकता है, और यदि मामले ज्यादा है तो सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल का गठन भी कर सकता है। मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महाजूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(14.3) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर या जज को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु नौकरी से निकालने एवं नार्क्को टेस्ट का फैसला लेने के लिए 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। जज या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी के सामने जूरी का निर्णय सुनायेंगे। यदि जज जूरी द्वारा दिए गए फैसले को खारिज करना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार चाहे तो फैसले की अपील प्रवृत कानूनों के अनुसार उच्च जूरी मंडल या उच्च न्यायालय में कर सकते है।
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(15) जनता की आवाज :
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(15.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(15.2) यदि कोई मतदाता धारा 15.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 15.1 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में कोई औचित्य पूर्ण प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के गंभीर प्रयास किये है। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि के रूप में हो सकता है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यदि राज्य के 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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======ड्राफ्ट का समापन=====
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए एक आम मतदाता के रूप में आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया “ मुख्यमंत्री कार्यालय ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
मुख्यमंत्री जी, प्रस्तावित जिला जूरी कोर्ट क़ानून को गेजेट में छापे - #GauNeeti , #P20180436111 , #VoteVapsiPassbook ,
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम / सीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
@Cmo... , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #GauNeeti , #P20180436111 , #VoteVapsiPassbook ,
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7. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (15) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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