Hindi Quote in News by Sonu Kumar

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*वैश्विक सत्ता की संरचना: विश्व बैंक नहीं, हथियार उद्योग असली शक्ति है*
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*1. आज की दुनिया को समझने के लिए सबसे पहले यह भ्रम तोड़ना आवश्यक है कि वैश्विक लूट, गुलामी और नियंत्रण के पीछे केवल बैंक, वर्ल्ड बैंक, WHO, WTO या फार्मा इंडस्ट्री ही सबसे बड़ी शक्ति हैं। वास्तविकता यह है कि ये सभी संस्थाएं केवल ऊपरी ढांचा है*
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*2. इन सभी के पीछे जो असली निर्णायक शक्ति काम करती है, वह है Weapon Industry (हथियार उद्योग) सत्ता का असली स्रोत पैसा नही बल्कि वह ताकत है जो बंदूक और बम के जरिए लागू की जा सके*

*बिना हथियार कोई नियंत्रण नही*
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*3. कोई भी देश, कोई भी साम्राज्य और कोई भी पूंजीवादी सत्ता बिना हथियारों के किसी दूसरे देश या समाज को नियंत्रित नहीं कर सकती*
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*4. यदि किसी देश के पास अपने स्वयं के हथियार नहीं हैं, तो वह हमेशा किसी हथियार-संपन्न देश पर निर्भर रहेगा, और यही निर्भरता धीरे-धीरे राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक गुलामी में बदल जाती है*
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*5. बैंक पैसे छाप सकते हैं, संस्थाएं नियम बना सकती हैं, लेकिन उन नियमों को लागू कराने की शक्ति केवल हथियारों के पास होती है*

*6 खनिज लूट: सबसे बड़ी और सबसे छिपी हुई लूट*
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*6. दुनिया की सबसे बड़ी लूट खनिज संसाधनों में होती है—सोना, लिथियम, कोबाल्ट, यूरेनियम, तेल, गैस और कोयला*
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*7. आधुनिक टेक्नोलॉजी, हथियार, इलेक्ट्रिक गाड़ियां और डिजिटल सिस्टम सभी इन्हीं खनिजों पर आधारित है*
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*8. लेकिन इस लूट की खुली चर्चा कभी नहीं होती, क्योंकि खनिजों की लूट सीधे-सीधे हथियारों के दम पर कराई जाती है*
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*9. जहां खनिज हैं, वहां या तो गृहयुद्ध कराया जाता है, या तख्तापलट, या फिर आतंकवाद और शांति मिशन के नाम पर सैन्य हस्तक्षेप*

*WHO, WTO, World Bank: असली खिलाड़ी नहीं, मोहरे है*
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*10. WHO, WTO और World Bank जैसी संस्थाएं असल में छोटे-छोटे प्यादे हैं, जिन्हें आगे करके जनता को भ्रम में रखा जाता है*
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*11. ये संस्थाएं हथियार उद्योग और उससे जुड़े पूंजीवादी परिवारों को कानूनी, नैतिक और बौद्धिक कवर देती है*
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*12. असली निर्णय कहीं और होते हैं, और ये संस्थाएं केवल उन्हें लागू करने का जरिया बनती हैं*

*पूंजीवादी परिवारों की रणनीति*
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*13. यदि कोई व्यक्ति खुद को एक बार किसी बड़े पूंजीवादी परिवार के नजरिये से देखे, तो पूरी रणनीति साफ दिखने लगती है*
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*14. वे कभी भी सबसे बड़ी लूट को चर्चा में नहीं आने देते*
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*15. वे जानबूझकर छोटी-मोटी लूट, छोटे घोटाले और सीमित मुद्दों को इतना फेमस कर देते हैं कि जनता वहीं उलझ कर रह जाए*
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*16. भारत जैसे गुलाम या अर्ध-गुलाम देशों में बैंक घोटाले, फार्मा माफिया और NGO स्कैंडल को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है*
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*17. ये मुद्दे गलत नहीं हैं, लेकिन ये मुख्य मुद्दा नहीं है*
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*असली मुद्दा क्या है*

*18. असली मुद्दा है हथियार उद्योग, खनिज लूट, राजनीतिक नियंत्रण*
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*19. इसी त्रिकोण के दम पर पूरी दुनिया की सत्ता संरचना खड़ी है*
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*ध्यान भटकाने का पूरा नेटवर्क*

*20. खनिज लूट का एक छोटा-छोटा हिस्सा जानबूझकर अलग-अलग समूहों में बांटा जाता है*
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*21. इसमें बड़े राजनीतिक दल, उनकी IT सेल, टॉप लेवल के जज और नकली विपक्षी संगठन शामिल होते हैं*
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*22. कुछ तथाकथित क्रांतिकारी NGO और एक्टिविस्ट ग्रुप भी इसी सिस्टम का हिस्सा बना दिए जाते हैं*
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*सभी मिलकर आम जनता का ध्यान असली लूट से हटाते है और Conspiracy Theories को बढ़ चढ़ कर बढ़ावा देते है ताकि लोगो का ध्यान सही और उचित समाधान से भटका सके*

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*24. कई बार जानबूझकर अधूरी और अजीब conspiracy theories को फैलाया जाता है*
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*25. इसका उद्देश्य लोगों को भ्रमित करना, डराना और राजनीति से दूर रखना होता है*
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*26. ताकि ईमानदार लोग चुनाव लड़ने की बजाय केवल बहस और आलोचना तक सीमित रह जाएं*
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*चुनाव से डर क्यों*

*27. पूंजीवादी परिवारों का सबसे बड़ा डर यही है कि यदि ईमानदार और समझदार लोग बड़ी संख्या में चुनाव लड़ने लगेंगे, तो उनका पूरा खेल खत्म हो जाएगा*
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*28. क्योंकि तब हथियार उद्योग पर सवाल उठेंगे*
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*29. खनिज लूट पर सख्त कानून बनेंगे*
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*30. विदेशी नियंत्रण कमजोर पड़ेगा*
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*31. जनता सिर्फ वोटर नहीं, बल्कि सत्ता की असली मालिक बनेगी*
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*निष्कर्ष*

*32. दुनिया की असली समस्या बैंक नहीं है*
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*33. दुनिया की असली समस्या WHO या WTO नहीं हैं*

*34. दुनिया की असली समस्या है हथियार उद्योग के दम पर चलने वाली खनिज लूट और राजनीतिक गुलामी*

*35. जब तक जनता इस सच्चाई को समझकर सत्ता में सीधे हस्तक्षेप नहीं करेगी, तब तक केवल चेहरे बदलते रहेंगे, सिस्टम नहीं*
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*36. और जिस दिन यह समझ आम जनता तक पहुंच गई, उसी दिन पूंजीवादी परिवारों की सदियों पुरानी लूट की व्यवस्था हमेशा के लिए ढह जाएगी*

*अब इस मे एक आम जनता क्या कर सकती है? इसके उत्तर मे सरल उपाय है की जो जो लोग बदलाव चाहते है वो आगे बढे चुनाव लड़े आपसी सहयोग बना कर चुनाव मे प्रचार करे, जनता मे अच्छे कानून ड्राफ्ट को प्रचार करके सत्ता की तरफ बढे, जितनी ऊर्जा हम धरना रैली मे लगाते है उसका केवल 10% ऊर्जा को चुनाव लड़ने पर थोड़ा जोर देंगे तो सरलता से जीत मिल सकती है और निष्पक्ष चुनाव के लिए बैलेट पेपर चुनाव बेहद जरूरी है क्योकि चुनाव प्रक्रिया ईमानदारी से नही हुई तो सत्ता मे पूंजीवादी परिवारों के गुलाम नेता बने रहेंगे और निरंतर पर्यावरण को क्षति होती रहेगी निर्दोष लोग मरते रहेंगे*

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Hindi News by Sonu Kumar : 112013759
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