Hindi Quote in News by Sonu Kumar

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#06 विदेशी निवेश में कटौतियां

संवेदनशील क्षेत्रो में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमती दिए जाने के कारण भारत में विदेशियों का नियंत्रण लगातार बढ़ रहा है। यह कानून भारत के संवेदनशील क्षेत्रो में FDI पर रोक लगाकर सिर्फ सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कंपनियों की कारोबार करने की अनुमति देता है। कृपया ध्यान दें कि यह कानून सभी क्षेत्रो में FDI पर प्रतिबन्ध नहीं लगाता, बल्कि सिर्फ संवेदनशील क्षेत्रो में FDI पर निर्वन्धन लगाता है। इस कानून को संसद से साधारण बहुमत द्वारा पारित करके गेजेट में छापा जा सकता है। इस क़ानून का पूरा ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें

Tinyurl.com/ReduceFDI

प्रस्तावित विदेशी निवेश में कटौतियां क़ानून के मुख्य बिंदु निचे दिए गए है

कोई भी कंपनी अपने आप को वोइक यानी सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कम्पनी (Woic = Wholly Owned by Indian citizens Company) के रूप में पंजीकृत करवा सकती है। वोइक कम्पनी से आशय ऐसी किसी कम्पनी से है जिसके 100% अंश (Share) भरतीय नागरिको या भारतीय सरकार या किसी अन्य बोइक कंपनी के पास हों, और अमुक कम्पनी के कोई भी शेयर विदेशियों के पास न हों। निचे दिए गए क्षेत्रो में सिर्फ बोइक कम्पनियां ही कारोबार करेगी।

1. सिर्फ वोइक कम्पनियां ही संचार एवं मीडिया के क्षेत्र में काम कर सकेगी। संचार एवं मीडिया में सभी पाठ्य, दृश्य, श्रव्य माध्यम जैसे अखबार, मैगजीन, चैनल्स, फ़िल्में, इंटरनेट सेवाएं, सोशल मीडिया एवं टेलिकॉम आदि शामिल है।

2. गैर वोइक कम्पनी को भारत में बैंक एवं बीमा कम्पनी खोलने या ऐसी कोई भी वित्तीय कम्पनी खोलने की अनुमति नहीं होगी जो जमाएं (Deposits) स्वीकार करती है। राष्ट्रियकृत बैंक (Nationalised Bank) सिर्फ बोइक कम्पनी को ही कर्ज दे सकेंगे।

3. सिर्फ वोइक कम्पनियां ही रेलवे, सेटेलाईट एवं रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में कार्य करेगी। रक्षा उत्पादन में हथियार निर्माण एवं सैन्य उपकरण शामिल है।

4. सिर्फ बोइक कम्पनी को ही खनन (Minerals) एवं ऊर्जा (Power) के क्षेत्र में काम करने की अनुमति होगी।

5. सिर्फ वोइक कम्पनियां ही शैक्षिक निकाय, शिक्षा बोर्ड, विद्यालय एवं विश्वविद्यालय खोल सकेगी।

6. गैर बोइक कम्पनी भारत में कोई भी भूमि एवं निर्माण नहीं खरीद सकेगी, और न ही इन्हें 25 साल से अधिक अवधि के लिए किराये पर ले सकेगी।

7. मॉरीशस संधि, फिजी संधि, सिंगापुर संधि एवं इस प्रकार की सभी संधिया जो विदेशी पूँजी पर कम दर से आयकर, या कम दर से पूंजीगत लाभ कर लगाती है, अब से निरस्त की जाती है।

[टिप्पणी : यदि इस खंड की कोई धारा विश्व व्यापार संगठन (WTO) के किसी समझौते का उलंघन करती है तो WTO भारत को समझौते से बाहर कर सकता है, या प्रधानमंत्री भारत को WTO समझौते से अलग करने के लिए आवश्यक अधिसूचना जारी कर सकते है।]

राजवर्ग प्रजा के अधीन रहना चाहिए, वर्ना वो प्रजा को लूट लेगा और राज्य का विनाश होगा - अथर्ववेद

Hindi News by Sonu Kumar : 112013644
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