काश हमे कोई अपना बोले
ऐ काश कोई मेरे दिल को छूले
कोई काश कर शैतानी
कोई मेरी पलकों में झुला झूले
मेरे सपने भी किसी के बनके
काश की कोई थोड़ा नैनों को धोले
मेरी भी यादे किसी को कर्जा बनके
रात का अपना चैन भी खो दे
काश कभी जब थक के लौटूं
मेरे सर से पसीना कोई पोछे
काश हमे कोई अपना बोले
काश कोई मेरे दिल को छूले
आशीष जैन (श्रीचंद)