बेटा मेरा जब
लिपटता है बांहों में
जीवन पूरा जी
लेता हूँ अब कोई
तमन्ना नहीं है मेरी
उसे देख आँखों से
खुशियों की शराब
पी लेता हूँ
उसकी किलकारी
ताकत है मेरी
इस प्यारी चित्कार को
समझ पूरा जीवन
पी लेता हूँ
रोता है जब तो आँखे
भर आती है
उसको ख़ुशी देने को
खुद ख़ुशी भी कर लेता हूँ
सोता है रात जब
साथ मेरे साथ ही
सांसे लेता हूँ
बन कर ठंडी हवा का
झोका सा उसे बहो में भर
लेता हूँ
आशीष जैन (श्रीचंद)