"तू चली गई…"
तू चली गई, मगर दिल से गई नहीं,
तेरे बिना कोई सुबह, कोई शाम सही नहीं।
तेरी हँसी अब भी ख्वाबों में उतरती है,
पर आँख खुलते ही वो बात रही नहीं।
तेरे बिना भी जी रहा हूँ, ये झूठ ही सही,
पर जो ज़िंदा हूँ, उसमें ज़िंदगी कहीं नहीं।
कभी सोचा था, तुझे अपना बना लूँगा,
आज तू अपनी भी नहीं, मेरी भी नहीं।
तेरी चूड़ियों की खनक अब भी दिल में है,
पर उस घर में अब तेरी आहट नहीं रही।
तू किसी और की होकर भी मेरी ही लगती है,
ये मोहब्बत है शायद, या मेरी कमी रही।
तेरे जाने के बाद मैंने बहुत कुछ कह दिया,
पर जो कहना था तुझसे… वो बात मैंने कही ही नहीं।
_kuldeep Singh