वो आती है तो, उसको आने दो ज़रा भी रोकना मत
उलझ जाएंगी घबराकर,रास्ते में कहीं उसे रोकना मत
काई बार आई वो मेरी देहलीज पर,मगर मिला ही नहीं मैं
अब सीधे पते पर ही आ गई, तो उसे ज़रा भी टोकना मत
मिल लेने दो उसे, गले, दिल से,या तेज-तर्रार शरारती नैनों से, कहीं पे रुकती नहीं वो जरुरत से ज्यादा, तो अनाप-शनाप भोंकना मत
मेरा बिगाड़ेगी कुछ भी नहीं,इतनी बुरी भी नहीं है वो मासूम
फिर कभी नहीं आएगी इधर, तो इधर उधर की सोचना मत
तुम्हारे दिए हुए सब, तुमको देकर जाएंगी, सर,सरताज,सब,, ,
वर्ना भी कुछ ले जाये,तो मांग लेना उससे,ज़रा भी शर्माना मत
वो भी ले लेना जो तुमने दिया था अश्क अकराम, शोहरत शबाब सब
वो तो मेरी रूह की तलबगार है,उसे मेरे रूह से बिछडवाना मत
सारी जिंदगी उसके इंतजार में बैठे रहा, तभी लो अब आई और हंसके बोली
कभी झुका नहीं तु जेठा,मैं मोत हूं तो क्या? मेरे सामने भी सर झुकवाना मत