मेरा इश्क़ भी दिल से ही रवाँ है,
मेरी नफ़रत भी उसी दिल में पलती है,
मेरे जज़्बात भी दिल से बिखरते हैं,
मेरे एहसास उसी में मसलते हैं।
मेरे आँसू दिल की ज़मीन पर गिरते हैं,
मेरी ख़ुशी वहीं कहीं दफ़्न हो जाती है,
मेरी तन्हाई दिल की गलियों में भटकती है,
मेरे शोर भी वहीं आकर ख़ामोश हो जाते हैं।
मेरी दुआ दिल से उठकर ख़ुदा तक जाती है,
मेरी बददुआ भी दिल में ही दम तोड़ती है—
मगर हैरत है कि
एक वही शख़्स है,
जो इस दिल से
आज तक
रुख़्सत होना नहीं सीख पाया।
Amrita Singh ✍🏽