चुनाव फिर आया है,
वादे नये लाया है...
रामराज्य होगा, कलयुग में होगा ,
ऐसा कुछ नेताओं ने बताया है|
कोई मंदिर जायेगा, मजार पे भी चादर चढ़ायेगा,
धर्म का रक्षक होने की कलाकारी दिखायेगा|
दलित के पैर छुए जायेंगे,
नेता जी गरीब के मसीहा कहलायेंगे,
किन्तु नेता जी को पैदल चलने में दिक्कत है भाई,
Mercedes से गाँव-गुच्छे का चक्कर लगायेंगे...
जनता ही है भाग्यनिर्माता ,ये गुनगान गाया जायेगा,
नेता, अभिनेता, सब आपके दरवाज़े आयेगा,
हाथ जोड़कर बिनती करने का वक्त आया है...
अरे सुनो सुनो, चुनाव का मौसम छाया है...
बिहार का फिर से गुणगान करने एक गुजराती आयेगा,
‘जंगलराज को भूलना मत’ , ये याद हमें दिलायेगा,
गुजरात के लिये sahab, बिहार के लिये फ़क़ीर हो जायेगा...
ख़ैर, आपको क्या चिंता , भारत ‘हिन्दू राष्ट्र’ जो कहलायेगा...
एक मसीहा, आपके ही भाषा का, आपके ही इलाका का,
कुछ चुटकुला सुना, आपका मन भी बहलायेगा,
बदले में, कुछ वोट आपका माँग जायेगा...
ये बिहार है भैया,
ग्रेजुएट बेटा आपका बेरोज़गार कहलायेगा,
ग़रीबों का 9वीं फेल ‘तेजस्वी’ कहलायेगा...
जात, धर्म का भेद डालकर फिर चुनाव लड़ा जायेगा,
सरनेम में मिश्रा, यादव, ख़ान देखकर फिर जनता बूथ पे जायेगा,
अपने हित के लिये, विकास का गला फिर घोंटा जायेगा...
चुनाव का मौसम है भैया,
वर्णव्यवस्था का नाटक रंगमंच पे दिखाया जायेगा...
मीडिया, एंकर फिर बिहार आयेंगे,
जाने कितने डिबेट, चौपाल करवायेंगे,
पर ब्रेकिंग न्यूज़ में ‘ब्रेकिंग सच’ कहीं खो गया है...
लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को क्या हो गया है...
ये दुनिया एक रंगमंच है अगर,
तो बिहार एक कहानी है...
मिथिला, मगध और अंग प्रदेश के आँखों में आज पानी है...
आज़ादी के पटल से विनाश की गाथा लिखते आ रहा ,
ये आपके बिहार की कहानी है...
विनाश की गाथा सुना रहे जाने कितने आधुनिक ज्ञानी हैं,
मिथिला, अंग और मगध के आँखों में आज पानी है|<
रामराज्य जो चाहते हो, क्या उसमें शबरी का स्थान नहीं?
और है अगर, तो आज भी दलित, गरीब का क्यों मान नहीं?
क्या राम ने धर्म का भेद किया ?
या शबरी का झूठा खा के, पाप किया?
पूछो कि जिस रामराज्य की कल्पना ये नेता तुम्हें दिखा रहे,
क्या राम के आदर्श ये खुद मान रहे?
अगर नहीं ,तो तुम स्वयं राम बनो,
और कलयुगी रावण का वध करो...
राम का हथियार ‘बाण’ था,
तुम्हारा हथियार ‘मतदान’ है,
लौटाना बिहार का मान है...
दाँव पे आत्म-सम्मान है...
written by -shalu