महाकाली का दुष्ट-दमन 🔥
जब पाप बढ़े, अधर्म पले,
जब अन्यायी हँसते चले।
जब निर्दोषों का रक्त बहे,
जब नीति-धर्म सब छिन जाए।
तब धरा पुकारे जोर से,
"आओ माँ, अब रक्षा करो।"
कराल वदन, त्रिनेत्र ज्वाला,
अधर्म दलन का संकल्प भरो।
रक्तबीज का जब बीज उगा,
अत्याचार का अंधकार छा गया।
महाकाली ने शंखनाद किया,
हर दानव का मस्तक गिरा दिया।
कर में खड्ग, कर में त्रिशूल,
रक्तपान कर देती शूल।
काली गर्जना से थर्राए गगन,
न्याय का होता पुनर्जन्म।
काली माँ न करती भेद,
न कोई सिंहासन, न कोई वेद।
जो दुष्ट पथ पर चलते हैं,
वे माँ की ज्वाला में जलते हैं।
जो शासक बन कर अत्याचार करें,
जो सत्ता के नशे में धर्म हरें।
महाकाली उनके शिर काटें,
सत्य का ध्वज फिर ऊँचा उठाएँ।
माँ काली का आशीष यही,
सत्य सदा विजयी हो यही।
दुष्ट-दमन का संदेश अमर,
"अन्याय मिटेगा जड़ से हर।"