खड्डे में गिरकर भी सीधा खड़ा हूं।
मुझे गिराने वालों मैं तुमसे बड़ा हूं।
जहर मुझ पर करेगा नहीं-असर ।
पहले ही बिषधरों के साथ पड़ा हूं।
तुम क्या मार पाओगे प्यार से मुझे।
ऐसे प्यार में कितने ही बार मरा हूं।
कुछ असर नहीं होगा तेरा मुझ पर।
मैं बन गया अब वह चिकना घड़ा हूं।
तुम चाहो भी,नहीं जला पाओगे मुझे।
मैं बरगद बिन बरसात के हरा भरा हूं।
तुमने धोखे से कब-कब हराये मुझे।
देखो तुम्हारे सामने,अब भी अड़ा हूं।
खड्डे में गिरकर भी सीधा खड़ा हूं।
मुझे गिराने वाले मैं तुमसे बड़ा हूं।
आर के भोपाल।