"अहज़ान-ए-गरीब"
वो अमीर क्या जाने अहज़ान-ए-गरीब क्या होता है,
उस गरीब से पूछो जो कितनी बार खाली पेट सोता है।
बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल समझते है ये अमीर गरीबी को,
वो गरीब कितनी मुश्किल से परिवार का बोझ ढोता है।
उस गरीब के बच्चों के अरमान गरीबी तले दब गए,
वो पढ़ाई छोड़ कर किसी ढाबे पर झूठे बर्तन धोता है।
बेटी का ब्याह करने के लिए दहेज़ जुटाता है ज़ब वो,
टूटा सा मकान गिरवी रख सब कुछ अपना वो खोता है।
बेबसी, दिल-ए-अफ़सुर्दा पर शफ़क ना हुई किसी को,
ज़ब क़र्ज़ वाले तशहीर करते है वो छुप छुप के रोता है।
गरीब को सताया है तेरे कर्म का हिसाब होगा एक दिन,
अंत में इंसान वही फसल काटता है जो वो बोता है।
कहते है अपनों परायों का बुरे वक़्त में पता चलता है,
पर "कीर्ति" अमलन गरीबों का तो खुदा भी नहीं होता है।
Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️
अहज़ान-ए-गरीब = गरीब का दर्द, दुख
बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल = आसान और सरल कार्य
दिल-ए-अफ़सुर्दा = दुखी ह्रदय, मायूस, दुःख से भरा हुआ
शफ़क = वो मनोवेग जो दूसरे का दुःख देखकर उत्पन्न होता है
तशहीर = ढिंढोरा पीटना, मशहूर करना, बदनामी, रुसवाई
अमलन = यथार्थ में, सच में, सत्यता पूर्वक