प्रेम इसलिए किसी से नहीं करो कि तुम अकेले हो या मन नहीं लग रहा.
प्रेम तुम तब करना जब किसी को देख कर लगे कि यार इसके साथ ज़िंदगी जिया जा सकता है. इसका साथ चाहिए और कुछ नहीं चाहिए. इसकी ख़ुशी के लिए कुछ भी कर सकते हैं और इसे ग़म देना मौत को गले लगाने सरीखा है.
किसीको बीच राह में अकेले मरने के लिए जिंदा लाश मत बनने देना और डिप्रेशन का मरीज बनाकर कठोर मत बनने देना..
ऐसे इंसान की भावनाओं से खेलकर किसीको पल पल मरने के लिए मरता छोड़ मत भाग छूटना।
वहीं इंसान आपकी दुनिया है उसके बिना जिंदगी दुश्वार लगे जी ना सको... शादी करके जिन्दगी सवार सको..
जब तक ये फ़ील न हो I love you बोलने वाली नौटंकी मत करना. तुम किसी इंसान को चुन रहे हो न कोई खिलौना मन बहलाने के लिए समझे न!