तुमने मुझको छोड़ दिया,
अब अच्छा लगता है।
मैंने भी मुंह मोड़ लिया,
अब अच्छा लगता है।
दिल टूटा,पर स्वप्न संजोना,
अच्छा लगता है।
छोड़के सबको,तुम्हें मनाना,
अच्छा लगता है।
खिले बाग में सुबह टहलना,
अच्छा लगता है।
फूल तोड़ना मना तो तोड़ना,
अच्छा लगता है।
गांव से भागे शहर गये।
शहर बने विषाक्त गांव अब,
अच्छा लगता है।
आर के भोपाल।