टूटे दिल के टुकड़े समेट हालात समझते देखा है,
लड़खड़ाते क़दमों से गिरते संभलते देखा है,
अपने आक्रोश को अपना ज़ज़्बा बनते देखा है,
अपनी तन्हाई और अश्कों को अल्फाज़ बनते देखा है,
मैंने एक साधारण सी लड़की को शायरा बनते देखा है,
हाँ.... मैंने खुद को शायरा बनते देखा है।
हाँ.... मैंने खुद को शायरा बनते देखा है।
Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️