औरत और उसके राज़ !
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भाई, औरत वो किताब है जिसे पढ़ने का शौक सबको है, लेकिन समझने का हुनर किसी-किसी को।
उसकी ज़ुबान पर जो मीठा है, वो असली नहीं।
असली खेल तो उसकी आँखों, खामोशियों और आदतों में छिपा होता है।
1. सच में दिल लगा तो रास्ते खुद खुल जाते हैं। बहाने सिर्फ उन पर खर्च होते हैं जिनसे उसका मन उचट चुका हो।
2. जिस्म की हाँ-ना पहले ही लिखी जा चुकी होती है। तुम चाहे शेर सुनाओ या शायरी, वो पहले ही तय कर चुकी है कि बिस्तर की चाबी देनी है या ताला जड़ना है।
3. हर मुलाक़ात इम्तिहान है। औरत चुपके-चुपके देखती है—क्या तुम मर्द हो या बस नाम के।
4. पूजा से नहीं, ऊँचाई से खिंचती है। जो उसके सिर पर ताज बन सके, वो दिल ले जाता है। जो बस पाँव में फूल चढ़ाए, वो फुटनोट बन जाता है।
5. दिल के मंदिर में अक्सर कोई बैकअप मूर्ति रखी होती है। "सिर्फ तुम ही हो"—ये लाइन बस शराब की मिठास है।
6. हुस्न से नज़रें टिक सकती हैं, मगर दिल वही रोक पाता है जिसके पास ताक़त और खुद पर भरोसा हो।
7. जब वो चुप हो जाए, समझ लो उसकी रूह पहले ही कहीं और निकल चुकी है।
8. कंट्रोल से बाहर मर्द ही उसे भाता है। अच्छा लड़का? वो बस गली-मोहल्ले की मीठी बात है। असली दिल उसी का होता है जो अपनी शर्तों पर जीता है।
9. रोज़-रोज़ की दाल-रोटी बोर कर देती है। औरत को हमेशा थोड़ा रहस्य, थोड़ा नशा चाहिए।
10. ना कहने का हुनर औरतों ने ईजाद किया है। सीधा "ना" नहीं कहेंगी, बस बहानों की शराब उड़ेलती रहेंगी।
11. आँसू, खामोशी, मुस्कान—सब हथियार हैं। और मर्द इन्हें सच्चाई समझकर नशे में डूब जाता है।
12. धोखा भी देगी और मासूम भी बनेगी। और आप सोचते रहेंगे कि शायद ग़लती आपसे हुई।
13. सम्मान उसका असली सिक्का है। अगर देती है, तो आप बादशाह हैं। वरना आप बस उसका "वक़्त काटू" हो।
14. प्यार का हिसाब आपके जज़्बात से नहीं, उसके दिल की धड़कनों से चलता है।
15. वो कभी अलविदा नहीं कहती। बस धीरे-धीरे फेड हो जाती है—जैसे खाली पैग के बाद धुँधली रोशनी।
औरत को समझने का प्रयास शराब के दस पैग चढ़ाकर अंधाधुंध ड्राइविंग करने जैसा है। जैसे मैं कर रहा हूं। आप ये भूल मत करना।
आजतक कोई नहीं समझ सका।
आर के भोपाल