"खामोश लफ्ज़ो की गुफ़्तगू"
ऐ ख़ामोशी, चल जी भर के बात करे,
ख़ुद की ख़ुद से आज मुलाक़ात करे।
अल्फ़ाज़ लबों पे ठिठुरे क्यों बैठे हैं,
चल आज दिल से कुछ सवालात करे।
सदियों से तुझसे न कोई गुफ़्तगू हुई,
मौन है दरमियाँ, ख़ुद के नाम ये रात करे।
क्यों सूनी आंखों में सैलाब छुपा रखा है,
ग़िले दूर कर, अश्कों की बरसात करे।
आँसू, दर्द, घुटन — सब तोहफ़े हैं दुनिया के,
‘कीर्ति’ अब अपने नाम ख़ुशियों की सौगात करे।
Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️