अब हम कोई नहीं तेरे अपने कहलाने को,
ना हक़ है अब तुझसे सवाल जताने को।
तू अपनी दुनिया में खुश रहे, यही दुआ है मेरी,
तेरी मोहब्बत की यादें ही अब सज़ा हैं मेरी।
गलती मेरी थी, इसे मैं भी मान गई,
तेरे खामोश लफ़्ज़ों से मैं रो-रो कर थक गई।
सज़ा इतनी गहरी मिली कि साँसें भारी हो गईं,
तेरे बिन जिए लम्हें भी तन्हाई से प्यारी हो गईं।
तू अपना कल बनाए, मैं अपना अतीत भूल जाऊँ,
तेरे ख्वाबों से दूर, तन्हा सफ़र में डूब जाऊँ।
ना हो हमारी मुलाक़ात किसी मोड़ पर कभी,
ना गूंजे मेरा नाम तेरे दिल के किसी कोने में अभी।
सत्रह साल की खामोशियाँ, आज आंसुओं में ढल गईं,
तेरी बेरुख़ी की चोट से मेरी रूह तक जल गईं।
अब ना लौटूँगी मैं उस मोहब्बत के दरवाज़े पर,
जहाँ उम्मीदें टूटीं, और दिल रह गया अधूरे सफ़र पर।
ये आख़िरी बार लिख रही हूँ, तुझसे कुछ कहने को,
अब ना कोई ख़्वाब होगा, ना तुझे रोकने को।
तेरा रास्ता तेरा है, मेरा रास्ता अब मेरा होगा,
इस अलविदा के बाद फिर कभी सामना ना होगा।
बस एक दुआ रह जाएगी, तू हमेशा मुस्कुराए,
मेरी मोहब्बत की परछाई तुझे फिर कभी सताए।
मैं अपनी तन्हाईयों में, तुझे आख़िरी बार याद करूँगी,
और फिर हमेशा के लिए तुझसे दूर सफ़र चुन लूँगी।
kajal Thakur 😊